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हरियाणा में सरकारी दमन का मुंह तोड़ जवाब
हरियाणा मे सरकारी दमन का मूंह तोड़ जवाब
6 जून को कुरूक्षेत्र जिला के शाहबाद में सूरजमुखी उत्पादक किसानों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग करने पर किये गए लाठीचार्ज और किसान नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे पर आज पीपली (कुरुक्षेत्र) में एक विशाल महापंचायत हुई। हरियाणा और अन्य प्रदेशों से भारी संख्या में आक्रोशित किसानों ने हिस्सा लिया।
उल्लेखनीय है कि केंद्र व राज्य सरकार एक तरफ तो दावा करती रही है एम एस पी है और रहेगा जबकि दूसरी ओर जो भी फसल मंडी में आई है उसे खरीदा नहीं जा रहा। सरकार कहती है जो भाव मिल रहा है उसमें बेच दो और सरकार 1000/ प्रति क्विंटल भावांतर देगी प्राईवेट खरीद का रेट 4000/ है। जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 6400/ है। भावांतर मिल भी जाए तो 1400/ प्रति क्विंटल का घाटा किसान को होता है।
सरकार के हाथों करवाई जा रही इस लूट के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर किया गया पुलिस दमन के विरोध में हुई इस महापंचायत में हरियाणा ,पंजाब व अन्य जगहों से अनेक किसान नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें राकेश टिकैत,बलबीर सिंह राजेवाल, प्रेम सिंह गहलावत,इन्द्र जीत सिंह,सत्यवान,मंजीत राय,रमिंदर पटियाला,सतनाम अजनाला,तेजिंदर विर्क,विकास सीसर,सुरेश कोथ,अमरजीत मोहरी, सुखविंदर सिंह , रंजीत (राजू), लखोवाल,मंजीत सिंह धनेर शामिल रहे और उन्होंने पंचायत में अपने विचार रखे।
मनोज सहरावत, वीरेंदर हूडा,धीरज गाबा आदि आए। इन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों की आजीविका के लिए जीवन मरण का सवाल है। शाहबाद की घटना से सरकार की बदनीयत स्पष्ट हो गई है।
आंदोलन की स्थानीय कमेटी ने महापंचायत के अंत में यह घोषणा की कि मुख्य मार्ग पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। एक बहुत बड़ा काफिला मंडी से चल पड़ा और हाईवे पर धरना शुरू हो गया। इसके उपरांत स्थानीय प्रशासन ने सरकार की ओर से बातचीत शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो मांग हैं । गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य गिरफ्तार किसानों को रिहा किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सूरजमुखी खरीदी जाए। इस बीच हजारों किसान हाईवे पर डेरा डाले हैं और लंगर की पूरी व्यवस्था हो गई है।
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